हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत 'नहजुल बलाग़ा' किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
امیرالمؤمنین علی علیهالسلام:
تَزُولُ الْجِبَالُ وَ لَا تَزُلْ، عَضَّ عَلَی نَاجِذِکَ، أَعِرِ اللَّهَ جُمْجُمَتَکَ، تِدْ فِی الْأَرْضِ قَدَمَکَ، ارْمِ بِبَصَرِکَ أَقْصَی الْقَوْمِ وَ غُضَّ بَصَرَکَ، وَ اعْلَمْ أَنَّ النَّصْرَ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ سُبْحَانَهُ
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमायाः
यदि पहाड़ हिल जाएँ, तो तुम अटल रहो। दाँतों को भींच लो, अपना सिर अल्लाह की राह में कुर्बान करने के लिए तैयार हो जाओ, अपने पैरों को ज़मीन में कील की तरह गाड़ दो, अपनी नज़र को दुश्मन के आखिरी व्यक्ति तक पहुँचाओ, भयानक दृश्यों पर से अपनी नज़र बंद कर लो, और जान ले कि विजय अल्लाह तआला की ओर से ही है।
नहजुल बलाग़ा, ख़ुतबा 11
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